Vaibhav : रोज 8 घंटे अभ्यास और 600 से ज्यादा गेंदें, ऐसे बना 15 साल का क्रिकेट सुपरस्टार

Atul Kumar
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Vaibhav

Vaibhav – इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पिछले दो सीजन में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को चौंकाने वाले वैभव सूर्यवंशी आज दुनिया के सबसे चर्चित युवा बल्लेबाजों में शामिल हैं। महज 15 साल की उम्र में भारतीय टी20 टीम में जगह बनाने वाले इस युवा खिलाड़ी की सफलता के पीछे छह साल की कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार का बड़ा त्याग छिपा हुआ है।

वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने उनकी सफलता के पीछे की कहानी साझा करते हुए कई ऐसे खुलासे किए हैं, जो हर युवा क्रिकेटर के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

रोज 8 घंटे करते थे अभ्यास

पटना स्थित अपनी अकादमी में आठ साल की उम्र से वैभव सूर्यवंशी को ट्रेनिंग देने वाले कोच मनीष ओझा के अनुसार, युवा बल्लेबाज रोजाना लगभग आठ घंटे अभ्यास करता था।

उन्होंने बताया कि अभ्यास सत्र सुबह 7:30 बजे शुरू होता था और शाम करीब चार बजे तक चलता था। इस दौरान वैभव लगातार नेट्स, थ्रोडाउन और बॉलिंग मशीन के जरिए अपनी बल्लेबाजी को निखारते थे।

रोज खेलते थे 600 से ज्यादा गेंदें

मनीष ओझा ने बताया कि वैभव की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह हर दिन 600 से अधिक गेंदों का सामना करते थे।

उन्होंने कहा,

“हम गेंदों की गिनती नहीं करते थे, लेकिन न्यूनतम अनुमान के अनुसार वह रोज 600 से ज्यादा गेंदें खेलते थे।”

100 ओवर तक चलता था अभ्यास

कोच ने बताया कि एक दिन के अभ्यास में लगभग 100 ओवर तक बल्लेबाजी कराई जाती थी।

उन्होंने कहा,

“करीब 200-300 गेंदें मैं खुद थ्रोडाउन करता था। जब मैं थक जाता था तो सहायक स्टाफ मदद करता था और फिर अकादमी के गेंदबाज अभ्यास जारी रखते थे। कभी-कभी वे भी थक जाते थे।”

इस अभ्यास में नेट गेंदबाजी, थ्रोडाउन और बॉलिंग मशीन तीनों का इस्तेमाल किया जाता था।

छह साल की मेहनत से बनी ‘मसल मेमोरी’

पूर्व क्रिकेटरों ने वैभव सूर्यवंशी के बैट स्विंग और फॉलो-थ्रू की काफी तारीफ की है।

कोच मनीष ओझा का मानना है कि लगातार छह वर्षों तक एक जैसी तकनीक पर काम करने से उनमें मजबूत ‘मसल मेमोरी’ विकसित हुई।

उन्होंने कहा,

“बार-बार एक ही चीज को दोहराने से उनका कौशल मजबूत हुआ। सही तकनीकी मार्गदर्शन और समर्पित कोचिंग सिस्टम की वजह से सकारात्मक परिणाम मिले।”

माता-पिता के त्याग ने बनाई सफलता की राह

मनीष ओझा ने वैभव सूर्यवंशी की सफलता का बड़ा श्रेय उनके माता-पिता संजीव और आरती को दिया।

उन्होंने कहा,

“बिना माता-पिता के सहयोग के कुछ भी संभव नहीं है। संजीव जी ने मुझ पर भरोसा किया, जबकि उस समय मैं बहुत प्रसिद्ध कोच नहीं था।”

मां रोज सुबह 2 बजे उठकर बनाती थीं खाना

कोच ने बताया कि वैभव की मां आरती रोज सुबह दो से ढाई बजे उठ जाती थीं और 10 से 15 लोगों के लिए खाना तैयार करती थीं।

पिता और पुत्र सुबह करीब पांच बजे समस्तीपुर से पटना के लिए निकल जाते थे। इतना ही नहीं, अकादमी के गेंदबाजों और कई अन्य बच्चों के लिए भी घर से खाना भेजा जाता था।

ओझा ने कहा,

“अगर कोई बच्चा अपना खाना लाना भूल जाता था, तो वह भी वैभव के भोजन में शामिल हो जाता था। रोज इतनी मेहनत करना अपने आप में बहुत बड़ा समर्पण है।”

ढाई घंटे का सफर तय कर पहुंचते थे अकादमी

आठ साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी पहली बार समस्तीपुर से पटना स्थित अकादमी पहुंचे थे।

एक तरफ का यह सफर करीब ढाई घंटे का था। कोच के अनुसार, इतनी छोटी उम्र में इतनी दूर से अभ्यास के लिए आना उन्हें बेहद प्रभावित कर गया था।

अब बन चुके हैं लाखों बच्चों के रोल मॉडल

मनीष ओझा ने बताया कि वैभव की सफलता के बाद अब बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को क्रिकेट अकादमी में लेकर आ रहे हैं।

उन्होंने कहा,

“आज हालात ऐसे हैं कि लोग नौ-दस साल ही नहीं, बल्कि पांच साल के बच्चों को भी लेकर आ रहे हैं। वैभव पूरे भारत के बच्चों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।”

इंग्लैंड दौरे के लिए मिली टीम इंडिया में जगह

आईपीएल 2026 में 237 की शानदार स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी को हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय दौरे के लिए भारतीय टीम में भी चुना गया है।

उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा बना दिया है।

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