Jurel : 7 पारियों से फिफ्टी नहीं आई, फिर भी दबाव में नहीं थे जुरेल, बोले- ‘देश के लिए खेलना सबसे बड़ा सम्मान’

Atul Kumar
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Jurel – भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने मुश्किल परिस्थितियों में महत्वपूर्ण अर्धशतक लगाकर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम योगदान दिया। 25 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ने दूसरे दिन 68 गेंदों पर 51 रन की पारी खेली।

जुरेल ने अपनी इस पारी के दौरान दिखाया कि वह दबाव की स्थिति में भी संयम के साथ बल्लेबाजी कर सकते हैं। खास बात यह है कि इससे पहले उनकी पिछली सात पारियों में अर्धशतक नहीं आया था। हालांकि, जुरेल के मुताबिक वह इस खराब दौर को लेकर बिल्कुल दबाव में नहीं थे।

उन्होंने इसके लिए मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल का भी आभार जताया।

‘मुझ पर कोई दबाव नहीं था’

दिन का खेल खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जुरेल ने अपनी मानसिकता के बारे में खुलकर बात की।

उन्होंने कहा:

“सच कहूं तो मुझ पर कोई दबाव नहीं था। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान यही है कि मैं देश के लिए खेल रहा हूं।”

जुरेल ने साफ किया कि वह व्यक्तिगत आंकड़ों के बारे में ज्यादा नहीं सोचते। उनके लिए टीम की जरूरत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

गंभीर और गिल ने बढ़ाया हौसला

ध्रुव जुरेल ने बताया कि जब भी वह कप्तान शुभमन गिल या मुख्य कोच गौतम गंभीर से बातचीत करते हैं, तो दोनों उन्हें मैच की स्थिति के अनुसार खेलने की सलाह देते हैं।

उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी के लिए उतरने से पहले वह व्यक्तिगत उपलब्धि के बारे में नहीं सोचते।

उनका ध्यान सिर्फ इस बात पर रहता है कि उस समय टीम को उनसे क्या चाहिए।

यही मानसिकता उन्हें दबाव से दूर रखने में मदद करती है।

भारत ए के साथ खेलने का मिला फायदा

जुरेल ने यह भी बताया कि श्रीलंका दौरे से पहले उन्हें इसी परिस्थितियों में खेलने का मौका मिला था।

टेस्ट सीरीज से पहले वह इंडिया ए के लिए श्रीलंका में खेल चुके थे। इसके अलावा भारतीय टीम करीब 10 दिन पहले श्रीलंका पहुंच गई थी और खिलाड़ियों ने कोलंबो में अभ्यास किया।

जुरेल के मुताबिक टीम ने गॉल में भी चार-पांच अभ्यास सत्र किए।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में जितना ज्यादा बल्लेबाजी करेंगे, उतना ही बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

परिस्थितियों को समझने में मिली मदद

जुरेल ने कहा कि इंडिया ए के साथ खेलने और गॉल में अभ्यास करने से उन्हें यहां के माहौल और परिस्थितियों को समझने में काफी मदद मिली।

उनके मुताबिक इस अनुभव ने उनकी बल्लेबाजी में भी सुधार किया।

विदेशी परिस्थितियों में खेलने से उन्हें यह समझने का मौका मिला कि पिच किस तरह व्यवहार करती है और किन गेंदों पर जोखिम लेने से बचना चाहिए।

बारिश के कारण समय गंवाने के बाद बनाई थी बड़ी पारी की योजना

गॉल टेस्ट के शुरुआती दिनों में बारिश ने भारतीय टीम को काफी परेशान किया।

गीली आउटफील्ड और बारिश के कारण करीब दो सत्र का खेल प्रभावित हुआ। ऐसे में भारतीय टीम के सामने कम समय में ज्यादा रन बनाने की चुनौती थी।

लेकिन जुरेल ने स्पष्ट किया कि टीम की रणनीति जल्दबाजी में बड़े शॉट लगाने की नहीं थी।

उन्होंने कहा:

“हमारी योजना ज्यादा से ज्यादा रन बनाने की थी। ऐसा नहीं था कि पहली ही गेंद से बेखौफ होकर बड़े शॉट खेलने लगें।”

निचले क्रम में साझेदारियां बनाना था लक्ष्य

जुरेल ने बताया कि भारतीय टीम की कोशिश समझदारी से बल्लेबाजी करने और निचले क्रम में महत्वपूर्ण साझेदारियां बनाने की थी।

उनका उद्देश्य था कि विकेट बचाकर जितने ज्यादा रन बनाए जा सकते हैं, उतने बनाए जाएं।

इसी रणनीति के तहत जुरेल ने 68 गेंदों पर 51 रन की उपयोगी पारी खेली और भारत के स्कोर को 460 रन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जुरेल की पारी ने भारत को दिया मजबूती का आधार

भारत ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 9 विकेट पर 460 रन बना लिए थे।

जुरेल के अलावा देवदत्त पडिक्कल ने शानदार 167 रन की पारी खेली और भारतीय पारी को मजबूती दी।

जुरेल का अर्धशतक निचले क्रम में आया, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए इसका महत्व काफी ज्यादा रहा।

उनकी पारी ने भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में मदद की और श्रीलंका पर शुरुआती दबाव बनाने का मौका दिया।

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Atul Kumar

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क्रिकेट को देखता हूं और समझता हूं और आप लोगों तक नए-नए सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश करता हूं। लाइफ में हमेशा नई-नई चीजों को सीखने का शौक रखता हु, पुराने न्यूज़ को नए तरीके से प्रस्तुत करता हूं।

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