IPL – आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स का ownership battle अब सिर्फ business deal नहीं रह गया है। यह मामला अब transparency, bidding process और “fair competition” जैसे सवालों तक पहुंच चुका है।
अमेरिका स्थित कारोबारी काल सोमानी के नेतृत्व वाले consortium ने मंगलवार को खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और साफ कहा कि उन्होंने कभी bidding process से नाम वापस नहीं लिया था।
यानी कहानी अब सिर्फ “किसने खरीदा” तक सीमित नहीं रही—
बल्कि “कैसे खरीदा” पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजस्थान रॉयल्स में मित्तल परिवार की एंट्री
राजस्थान रॉयल्स की ownership structure में बड़ा बदलाव हुआ है।
फ्रेंचाइजी के अनुसार:
- उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल
- उनके बेटे आदित्य मित्तल
- और वैक्सीन निर्माता अदार पूनावाला
ने मिलकर लगभग 1.65 बिलियन डॉलर (करीब ₹15,600 करोड़) valuation पर बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है।
नई हिस्सेदारी का structure कुछ ऐसा बताया जा रहा है:
| निवेशक | हिस्सेदारी |
|---|---|
| मित्तल परिवार | लगभग 75% |
| अदार पूनावाला | लगभग 18% |
| मौजूदा निवेशक (मनोज बदाले समेत) | लगभग 7% |
ये valuation IPL इतिहास की सबसे बड़ी franchise deals में गिनी जा रही है।
काल सोमानी समूह क्यों नाराज है?
काल सोमानी के consortium ने एक विस्तृत बयान जारी कर दावा किया कि:
- वह शुरू से अंत तक “leading bidder” थे
- उनके पास पूरा funding support था
- और उन्होंने कभी बोली वापस नहीं ली
बयान में कहा गया:
“हम शुरू से अंत तक प्रमुख बोलीदाता थे और ownership group का हिस्सा न बन पाने से बेहद निराश हैं।”
यानी consortium का संकेत साफ है—
उन्हें लगता है कि deal आखिरी वक्त में पलटी गई।
“निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नहीं हुई”
Somani-led group का सबसे बड़ा आरोप यहीं है।
उन्होंने कहा:
“आखिर में जो परिणाम सामने आया, वह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रतिबिंबित नहीं करता।”
यह line business circles में काफी चर्चा में है।
क्योंकि आमतौर पर ऐसे बड़े franchise deals में public criticism कम देखने को मिलता है।
विशेषकर तब जब involved parties global billionaires हों।
क्या consortium ने सच में नाम वापस लिया था?
यहीं पूरा विवाद खड़ा हुआ।
राजस्थान रॉयल्स से जुड़े सूत्रों के मुताबिक:
- consortium के documents में issues थे
- due diligence concerns सामने आए
- और ownership approval process smooth नहीं थी
दूसरी तरफ Somani group का दावा बिल्कुल उल्टा है।
उनका कहना है:
- financing पूरी तरह तैयार थी
- documents उपलब्ध थे
- और board meeting उनकी bid approve करने के लिए बुलाई गई थी
लेकिन आखिर में “ऐसा नहीं हुआ।”
IPL franchises अब सिर्फ cricket teams नहीं रहीं
राजस्थान रॉयल्स की इस deal ने एक बार फिर दिखाया है कि IPL franchises अब global sports assets बन चुकी हैं।
आज IPL teams में निवेशक शामिल हैं:
- tech billionaires
- global industrial groups
- private equity firms
- और international sports investors
₹15,000 करोड़ से ज्यादा valuation इसका सबसे बड़ा संकेत है।
अदार पूनावाला की एंट्री क्यों अहम मानी जा रही?
अदार पूनावाला पहले भी sports investments में दिलचस्पी दिखा चुके हैं।
लेकिन राजस्थान रॉयल्स में हिस्सेदारी लेना strategic move माना जा रहा है।
क्योंकि IPL अब सिर्फ Indian tournament नहीं—
global entertainment property बन चुका है।
विशेषकर:
- media rights boom
- worldwide streaming audience
- और franchise expansion plans
ने valuations को explode कर दिया है।
मनोज बदाले की भूमिका अब भी रहेगी
दिलचस्प बात ये है कि मौजूदा ownership group पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है।
मनोज बदाले समेत पुराने investors के पास:
- लगभग 7% हिस्सेदारी
बरकरार रहने की बात कही गई है।
यानी operational continuity पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
क्या यह मामला आगे और बढ़ सकता है?
फिलहाल कोई कानूनी विवाद officially सामने नहीं आया है।
लेकिन Somani consortium की language काफी strong रही।
विशेषकर:
- “fair competition”
- “never withdrew”
- “fully funded”
जैसे statements संकेत देते हैं कि अंदरूनी स्तर पर frustration काफी ज्यादा है।
हालांकि अभी तक राजस्थान रॉयल्स management की तरफ से इन आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
IPL ownership landscape तेजी से बदल रहा
पिछले कुछ वर्षों में IPL franchises की valuation में जबरदस्त उछाल आया है।
| Franchise Deals Trend | बदलाव |
|---|---|
| शुरुआती IPL valuation | कुछ सौ करोड़ |
| वर्तमान बड़ी deals | ₹10,000 करोड़+ |
यानी IPL अब क्रिकेट league कम और global sports economy ज्यादा बन चुका है।
राजस्थान रॉयल्स के लिए इसका क्या मतलब?
नई ownership से franchise को:
- financial muscle
- international business reach
- और commercial expansion
में बड़ा फायदा मिल सकता है।
विशेषकर अगर मित्तल परिवार long-term infrastructure और global branding पर निवेश करता है।















