Kaur : प्रतिका की चोट से घबराया था ड्रेसिंग रूम, कोच अमोल मजूमदार ने सुनाया भावुक किस्सा

Atul Kumar
Published On:
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Kaur – आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। टीम इंडिया ने पहली बार कोई आईसीसी ट्रॉफी अपने नाम की, लेकिन इस ऐतिहासिक अभियान के बीच एक ऐसा पल भी आया था जिसने पूरे ड्रेसिंग रूम की धड़कनें बढ़ा दी थीं।

नॉकआउट मुकाबलों से ठीक पहले टीम की इन-फॉर्म ओपनर प्रतिका रावल चोटिल हो गईं। उस समय ऐसा लग रहा था कि भारत के खिताबी सपने को बड़ा झटका लग सकता है।

हालांकि, टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ियों ने बेहद तेजी से फैसला लिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर के मुताबिक, प्रतिका के बाहर होने के बाद महज 30 सेकंड की मीटिंग में यह तय हो गया था कि उनकी जगह लेने के लिए शेफाली वर्मा से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता।

दिलचस्प बात यह रही कि शेफाली स्टैंडबाय खिलाड़ियों की सूची में भी शामिल नहीं थीं, लेकिन टीम को उनके अनुभव और मैच जिताने की क्षमता पर पूरा भरोसा था।

प्रतिका रावल की चोट ने बढ़ाई थी चिंता

विश्व कप के नॉकआउट चरण से पहले प्रतिका रावल शानदार फॉर्म में थीं और भारतीय बल्लेबाजी की अहम कड़ी बन चुकी थीं। ऐसे में उनकी चोट ने कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों दोनों को झटका दिया।

भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने उस पल को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने प्रतिका को मैदान से लंगड़ाते हुए बाहर जाते देखा, तो उनका दिल बैठ गया था।

अमोल मजूमदार ने क्या कहा?

बयानमुख्य बात
अमोल मजूमदारप्रतिका की चोट देखकर बड़ा झटका लगा
प्रतिक्रियाटीम के लिए यह बेहद कठिन स्थिति थी
चिंतानॉकआउट से पहले संयोजन बिगड़ने का खतरा

अमोल ने बताया कि एक कोच के तौर पर वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अंदर से काफी चिंतित थे।

30 सेकंड की मीटिंग में तय हो गया नाम

प्रतिका की चोट के बाद टीम मैनेजमेंट ने तुरंत विकल्प पर चर्चा शुरू की। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने खुलासा किया कि यह शायद टीम की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक थी।

हरमनप्रीत के मुताबिक, पहले सभी ने प्रतिका की फिटनेस के बारे में जानकारी ली। जब यह साफ हो गया कि वह वापसी नहीं कर पाएंगी, तब विकल्पों पर चर्चा हुई।

हरमनप्रीत कौर का खुलासा

उन्होंने कहा,

“हम सब एक साथ बैठे और लगभग 30 सेकंड के भीतर हर किसी ने सिर्फ एक नाम लिया—शेफाली, शेफाली, शेफाली। इसके बाद कोई चर्चा ही नहीं हुई। हर कोई जानता था कि वही सही विकल्प हैं।”

हरमनप्रीत ने यह भी बताया कि बीसीसीआई को भी पूरा विश्वास था कि शेफाली टीम में आकर प्रभाव छोड़ेंगी।

स्मृति मंधाना ने बताया क्यों चुनी गईं शेफाली

उपकप्तान स्मृति मंधाना का मानना था कि नॉकआउट जैसे बड़े मुकाबलों में सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि अनुभव भी उतना ही जरूरी होता है।

स्मृति ने कहा कि टीम को ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी जो ओपनिंग कर सके, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव रखता हो और दबाव वाले मैचों में फर्क पैदा करने की क्षमता रखता हो।

शेफाली को चुनने के पीछे प्रमुख कारण

कारणविवरण
अंतरराष्ट्रीय अनुभवबड़े मैच खेलने का अनुभव
आक्रामक बल्लेबाजीमैच का रुख बदलने की क्षमता
ओपनिंग विकल्पप्रतिका की भूमिका निभाने में सक्षम
घरेलू फॉर्मलगातार शानदार प्रदर्शन

स्मृति ने यह भी बताया कि उन्होंने शेफाली से कहा था कि वह सेमीफाइनल और फाइनल को घरेलू क्रिकेट की तरह खेलें और दबाव को अपने ऊपर हावी न होने दें।

टीम से बाहर होने के बाद मुश्किल दौर से गुजरी थीं शेफाली

विश्व कप टीम में शुरुआती चयन नहीं होना शेफाली वर्मा के लिए आसान नहीं था। भारत की सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में गिनी जाने वाली शेफाली ने स्वीकार किया कि वह उनके करियर के सबसे कठिन दौरों में से एक था।

शेफाली ने क्या कहा?

“विश्व कप टीम में जगह नहीं मिलना मेरे लिए सबसे दुखद बातों में से एक था। जहां भी जाती थी, लोग यही पूछते थे कि मैं टीम में क्यों नहीं हूं।”

हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने खेल पर काम जारी रखा और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाया।

टीम से बाहर रहने के दौरान शेफाली का फोकस

पहलूतैयारी
फिटनेसलगातार मेहनत
बल्लेबाजीतकनीक पर काम
मानसिक मजबूतीपरिवार के साथ समय
अभ्यासअतिरिक्त ट्रेनिंग सत्र

शेफाली ने बताया कि उन्होंने अपने भाई से भी कहा था कि अगर वह अभ्यास में ढिलाई करें तो उन्हें तुरंत टोका जाए।

अचानक आया विश्व कप सेमीफाइनल का कॉल

विश्व कप के नॉकआउट चरण से पहले शेफाली को अचानक टीम में शामिल होने का संदेश मिला। उस समय वह होटल में अपने दोस्त के साथ समय बिता रही थीं।

उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि टीम में क्या चल रहा है, क्योंकि वह टूर्नामेंट को बहुत करीब से फॉलो नहीं कर रही थीं।

वह कॉल जिसने सब बदल दिया

स्थितिविवरण
स्थानहोटल
फोन कॉलमैनेजर का कॉल
खबरप्रतिका रावल चोटिल
फैसलातुरंत टीम से जुड़ने का निर्देश

शेफाली ने कहा कि उन्हें प्रतिका के लिए दुख हुआ, लेकिन साथ ही यह भी महसूस हुआ कि उन्हें कुछ ही घंटों में विश्व कप सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले के लिए मानसिक रूप से तैयार होना होगा।

उन्होंने माना कि लगभग एक साल तक टीम से बाहर रहने के बाद अचानक ऐसी स्थिति से तालमेल बैठाना आसान नहीं था।

भारत की ऐतिहासिक ट्रॉफी जीत में बना अहम मोड़

प्रतिका रावल की चोट भारतीय टीम के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती थी, लेकिन टीम मैनेजमेंट के त्वरित फैसले और शेफाली वर्मा की वापसी ने कहानी बदल दी।

क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि बड़े टूर्नामेंट सिर्फ प्रतिभा से नहीं, बल्कि सही समय पर लिए गए फैसलों से भी जीते जाते हैं। भारत के लिए शेफाली को वापस बुलाने का फैसला ऐसा ही एक कदम साबित हुआ।

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