Dhruv : शतक के बाद ध्रुव जुरेल ने क्यों दी सलामी? बांह पर ‘जय जवान, जय किसान

Atul Kumar
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Dhruv – भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन ध्रुव जुरेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपने टेस्ट करियर का दूसरा शतक जड़ दिया। जुरेल ने मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और टीम इंडिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि जुरेल के शतक से ज्यादा चर्चा उनके सेलिब्रेशन की हुई। शतक पूरा करते ही उन्होंने सलामी दी और अपनी बांह पर बना एक खास टैटू भी दिखाया। उनके बाएं हाथ पर ‘जय जवान, जय किसान’ लिखा हुआ है।

शतक के बाद जुरेल ने बताया कि इस टैटू और सलामी के पीछे उनके परिवार से जुड़ी बेहद खास कहानी है।

शतक के बाद जुरेल ने क्यों दी सलामी?

ध्रुव जुरेल ने मैच के बाद बताया कि उनके दादा किसान थे, जबकि उनके पिता भारतीय सेना में रहे हैं।

इसी वजह से उन्होंने अपने बाएं हाथ पर ‘जय जवान, जय किसान’ लिखवाया है। जुरेल के मुताबिक यह टैटू उनकी जड़ों और परिवार की पहचान से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने बताया कि वह अपनी जड़ों को कभी भूलना नहीं चाहते। इसलिए शतक पूरा करने के बाद दी गई सलामी उनके पिता और दादा को समर्पित थी।

जुरेल का यह सेलिब्रेशन सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। क्रिकेट फैंस ने उनके इस अंदाज को काफी पसंद किया।

‘जय जवान, जय किसान’ टैटू के पीछे है परिवार की कहानी

ध्रुव जुरेल के लिए यह सिर्फ एक टैटू नहीं है, बल्कि उनके परिवार और उनकी पहचान का प्रतीक है।

उनके दादा किसान थे और उनके पिता सैनिक रहे हैं। ऐसे में ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा उनके परिवार की दोनों पीढ़ियों को जोड़ता है।

जुरेल ने बताया कि यही उनकी जड़ें हैं और वह इन्हें भूलना नहीं चाहते।

यही कारण है कि उन्होंने शतक पूरा करने के बाद सलामी देकर अपने पिता और दादा को याद किया।

मोहम्मद सिराज ने निभाई बड़ी भूमिका

ध्रुव जुरेल ने अपने शतक के दौरान मोहम्मद सिराज की भी खास तारीफ की।

जुरेल के शतक के करीब पहुंचने के बाद सिराज ने काफी देर तक उनका साथ दिया। सिराज ने 29 गेंदों का सामना किया और जुरेल को अपना शतक पूरा करने का मौका दिया।

जुरेल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब भी वह सिराज से बात करते हैं तो उन्हें लगता है कि सिराज उनसे भी ज्यादा जश्न मनाते हैं।

उन्होंने सिराज की रक्षात्मक बल्लेबाजी की भी तारीफ की और बताया कि सिराज ने मुश्किल समय में उनका अच्छा साथ दिया।

शतक के बाद सिराज ने लगाया बड़ा शॉट

जुरेल का शतक पूरा होते ही मोहम्मद सिराज ने आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन वह आउट हो गए।

इसके बाद ध्रुव जुरेल ने भी तेजी से रन बनाना शुरू किया। उन्होंने शतक पूरा करने के बाद दो छक्के लगाए।

भारतीय टीम का स्कोर 500 रन के पार पहुंचते ही कप्तान शुभमन गिल ने पारी घोषित करने का फैसला किया।

इसके बाद श्रीलंका की टीम बल्लेबाजी करने उतरी और भारतीय गेंदबाजों ने दिन के अंत तक दो विकेट हासिल कर लिए।

इससे मैच में श्रीलंका पर दबाव बढ़ गया।

भारत की पहली पारी में कई बल्लेबाजों ने किया शानदार प्रदर्शन

श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट की पहली पारी में भारत की ओर से सिर्फ ध्रुव जुरेल ने ही शतक नहीं लगाया।

देवदत्त पडिक्कल ने भी शानदार शतक जड़ा और भारतीय पारी को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया।

इसके अलावा कप्तान शुभमन गिल और विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने भी अर्धशतक लगाए।

भारतीय बल्लेबाजों के इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम ने 500 से ज्यादा रन बनाए और इसके बाद पारी घोषित कर दी।

भारत ए के श्रीलंका दौरे से मिला फायदा

ध्रुव जुरेल ने यह भी बताया कि इससे पहले भारत ए के साथ श्रीलंका का दौरा करने से उन्हें मौजूदा टेस्ट सीरीज की तैयारी में काफी मदद मिली।

श्रीलंका की परिस्थितियों में खेलने का अनुभव उन्हें यहां की पिच, मौसम और गेंदबाजों को समझने में मददगार साबित हुआ।

इसी अनुभव का फायदा जुरेल को दूसरे टेस्ट में अपनी पारी के दौरान भी मिला।

क्या है ‘जय जवान, जय किसान’ का इतिहास?

‘जय जवान, जय किसान’ भारत के इतिहास के सबसे प्रसिद्ध नारों में से एक है।

यह नारा भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था।

यह नारा 1965 के दौर से जुड़ा है, जब भारत-पाकिस्तान युद्ध के साथ देश को खाद्य संकट और अकाल जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ रहा था।

ऐसे समय में इस नारे के जरिए देश की रक्षा करने वाले जवानों और देश के लिए अन्न पैदा करने वाले किसानों के योगदान को सम्मान दिया गया।

इसका उद्देश्य सैनिकों और किसानों का मनोबल बढ़ाना तथा देश के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करना था।

जुरेल का सेलिब्रेशन क्यों बना खास?

क्रिकेट मैदान पर खिलाड़ी अक्सर शतक के बाद अलग-अलग अंदाज में जश्न मनाते हैं। लेकिन ध्रुव जुरेल का सेलिब्रेशन उनके परिवार और देश की सेवा से जुड़ा था।

उन्होंने शतक के बाद सलामी देकर अपने पिता को सम्मान दिया और ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू दिखाकर अपने दादा को भी याद किया।

इस वजह से जुरेल का शतक सिर्फ क्रिकेट के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उनके परिवार, जड़ों और देश के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया।

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Atul Kumar

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क्रिकेट को देखता हूं और समझता हूं और आप लोगों तक नए-नए सूचनाएं पहुंचाने की कोशिश करता हूं। लाइफ में हमेशा नई-नई चीजों को सीखने का शौक रखता हु, पुराने न्यूज़ को नए तरीके से प्रस्तुत करता हूं।

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