UP Cricket – उत्तर प्रदेश में क्रिकेट को लेकर एक बड़ी मांग सामने आई है। उत्तर प्रदेश में तीन रणजी ट्रॉफी टीमें बनाने की मांग को लेकर युवा क्रिकेटरों और उनके अभिभावकों ने लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में प्रदर्शन किया।
रविवार को हुए इस प्रदर्शन में पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के करीब 250 युवा क्रिकेटरों और उनके अभिभावकों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में सिर्फ एक रणजी टीम होने की वजह से बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
युवा क्रिकेटरों की मांग है कि उत्तर प्रदेश में भी अलग-अलग क्षेत्रों के लिए क्रिकेट संघ बनाए जाएं और कम से कम तीन टीमें रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लें।
इकाना स्टेडियम में खिलाड़ियों और अभिभावकों का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ पूर्वांचल के तत्वावधान में पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों तथा उनके अभिभावकों ने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बराबर अवसर देने के लिए राज्य में तीन रणजी टीमें बनाई जानी चाहिए।
उनका तर्क है कि उत्तर प्रदेश की आबादी बहुत बड़ी है और एक ही टीम होने के कारण सभी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट के उच्च स्तर पर खेलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता।
25 करोड़ की आबादी, लेकिन रणजी टीम सिर्फ एक
क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में खिलाड़ियों को उनका उचित हक और अवसर देने के लिए एक से अधिक रणजी टीमें होनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की करीब 25 करोड़ की आबादी को देखते हुए राज्य में तीन क्रिकेट संघ और तीन रणजी टीमें होनी चाहिए।
इसी मांग को लेकर लगभग 250 खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों ने इकाना स्टेडियम में प्रदर्शन किया।
महाराष्ट्र और गुजरात का उदाहरण
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में महाराष्ट्र और गुजरात का उदाहरण भी दिया है।
इन दोनों राज्यों से तीन-तीन टीमें रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लेती हैं।
महाराष्ट्र की तीन टीमें
महाराष्ट्र से रणजी ट्रॉफी में:
- महाराष्ट्र
- मुंबई
- विदर्भ
की टीमें खेलती हैं।
इन टीमों का घरेलू क्रिकेट में लंबे समय से मजबूत इतिहास रहा है और मुंबई तथा विदर्भ ने रणजी ट्रॉफी में कई बार शानदार प्रदर्शन किया है।
गुजरात की तीन टीमें
गुजरात से:
- गुजरात
- बड़ौदा
- सौराष्ट्र
की टीमें घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेती हैं।
इन संघों की टीमें रणजी ट्रॉफी के अलावा बीसीसीआई द्वारा आयोजित अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं में भी खेलती हैं।
यूपी के खिलाड़ियों का तर्क क्या है?
यूपी के युवा खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों का मानना है कि राज्य का आकार और आबादी इतनी बड़ी है कि एक रणजी टीम सभी प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर नहीं दे सकती।
उत्तर प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए क्रिकेट संघ बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में बेहतर क्रिकेट ढांचा, अधिक मैच और उच्च स्तर पर खेलने के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं।
खिलाड़ियों का यह भी मानना है कि ज्यादा रणजी टीमें बनने से चयन प्रक्रिया का दायरा बढ़ेगा और घरेलू क्रिकेट में ज्यादा युवा खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का मौका मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी दिया गया हवाला
क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में खिलाड़ियों को अधिक अवसर देने के लिए एक से ज्यादा रणजी टीमें बनाने की जरूरत की बात कर चुके हैं।
हालांकि तीन रणजी टीमों को लेकर अंतिम फैसला बीसीसीआई और संबंधित क्रिकेट प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा।
क्या यूपी में बन सकती हैं तीन रणजी टीमें?
यह मांग पहली बार नहीं उठ रही है। उत्तर प्रदेश के आकार और आबादी को देखते हुए समय-समय पर राज्य को कई क्रिकेट संघों में बांटने की मांग सामने आती रही है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व रणजी ट्रॉफी में एक टीम करती है। ऐसे में तीन अलग-अलग क्षेत्रीय टीमों का गठन घरेलू क्रिकेट में बड़ा बदलाव होगा।
लेकिन इसके लिए केवल खिलाड़ियों की मांग पर्याप्त नहीं होगी। नए क्रिकेट संघों की मान्यता, प्रशासनिक ढांचा, मैदान, क्रिकेट अकादमियां, वित्तीय संसाधन और बीसीसीआई की स्वीकृति जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होंगे।
क्या तीन टीमों से बदल जाएगा युवा खिलाड़ियों का भविष्य?
अगर उत्तर प्रदेश में तीन रणजी टीमें बनाई जाती हैं तो घरेलू क्रिकेट में खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ सकती है।
इसका सीधा फायदा उन युवा क्रिकेटरों को मिल सकता है जिन्हें मौजूदा व्यवस्था में सीमित अवसर मिलते हैं।
अधिक टीमें होने का मतलब अधिक खिलाड़ियों को प्रथम श्रेणी क्रिकेट में जगह मिलना, अधिक मुकाबले खेलना और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अतिरिक्त मौका मिलना हो सकता है।
हालांकि तीन टीमों के गठन से प्रतिस्पर्धा और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की चुनौती भी सामने आएगी।













